नगर निगम, भिलाई Municipal Corporation of Bhilai ने इस राष्ट्रीय प्रोग्राम के तहत धूल भरे स्थलों में पानी का छिड़काव करने के लिए एंटी-स्मॉग गन वाहन क्रय किया है, लेकिन वायू प्रदूषण में कमी लाने कोई उपयोग नहीं किया है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) भारत सरकार Government of India ने पहल किया है कि देशभर में वायू प्रदूषण को कम करना है। इसके तहत देश के 131 शहरों में पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को 40 फीसदी तक कम करना है। निगम इस तरह से लापरवाही बर्तेगा, तब शहर धूल मुक्त कैसे होगा। यह सवाल खड़ा हो रहा है।
शो-पीस बनकर रह गया एंटी-स्मॉग गन
एंटी-स्मॉग गन anti-smog gun का क्षेत्र में उपयोग किया जाता, तो निगम के अधिकारी, कर्मचारी और शहर के लोग देख पाते कि किस तरह से काम करता है। वहीं लोगों को इसका लाभ मिलता। खास कर उन सड़को में जहां से गुजरना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है। वहीं निगम भिलाई का एंटी-स्मॉग गन एक शो-पीस showpiece बनकर रह गया है।
3 जगह है एक्यूआई स्टेशन
भिलाई में वायू प्रदूषण जांच करने तीन जगह एक्यूआई स्टेशन (वायु गुणवत्ता सूचकांक) तैयार किया गया है। इसमें पहला टाउनशिप के 32 बंगलों में, दूसरा सिविक सेंटर, भिलाई में लगाया गया है। वहीं तीसरा हथखोज, औद्योगिक क्षेत्र, भिलाई में लगाया गया है।
भिलाई की हवा है खराब
भिलाई स्टील प्लांट के टाउनशिप स्थित सिविक सेंटर, भिलाई में नवंबर के दौरान एक्यूआई 18 नवंबर को 110 और 19 अक्टूबर को 107 तक पहुंच गया था। यह वायू की खराब श्रेणी है। हथखोज में 26 नवंबर को एक्यूआई की स्थिति 104 तक पहुंच गई थी। 11 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भिलाई के अलग-अलग हिस्से में 9 दिन 90 से अधिक एक्यूआई रहा है। जो सेहत के लिए बेहत नहीं है।
धूल से होती है फेफड़ों की बीमारी
डॉक्टर तंमय जैन, डीएनबी रेस्पिरेटरी मेडिसिन, सीनियर कंसल्टेंट ने बताया कि न्यूमोकोनियोसिस यह अलग-अलग प्रकार के धूल कणों को सास के जरिए अंदर लेने से होने वाली फेफड़ों की बीमारी है। बिसिनोसिस बीमारी सिसल की धूल में सांस लेने से होती है। सिलिकोसिस बीमारी यह क्रिस्टलीय सिलिका धूल के संपर्क में आने से होती है, जो पत्थर, चट्टान, रेत और मिट्टी में पाई जाती है। सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज धुएं, धूल या रसायनों के संपर्क में रहने के कारण यह बीमारी हो सकती है। ब्रोंकाइटिस और एम्फिसिमा, यह सीओपीडी धूल की वजह से और बिगड़ सकते हैं। अस्थमा रोग धूल, विशेष रूप से डस्ट माइट (धूल के कण) एलर्जी वाले लोगों की तबीयत और बिगाड़ सकते हैं।
जल्द किया जाएगा धूल से निपटने उपयोग
तुलेश्वर साहू, प्रभारी अधिकारी, जनसंपर्क विभाग, नगर निगम, भिलाई ने बताया कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत एंटी-स्मॉग गन लिया गया है। इसका जल्द नगर निगम, भिलाई क्षेत्र में धूल से निपटने के लिए उपयोग किया जाएगा। https://www.patrika.com/videos/exclusive/watch-the-video-amazing-work-of-corporation-officers-they-did-not-even-construct-the-building-but-issued-a-tender-of-rs-13-lakh-in-the-name-of-maintenance-20096700