
बोबनी करता किसान
जिले में रबी सीजन की बोवनी इन दिनों तेज गति से चल रही है। अतिवृष्टि और सिंचाई सुविधा के कारण किसान इस बार जौ और गेहूं को अपनी मुख्य फसल मानकर बोवनी कर रहे हैं। हालांकि कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल तिलहन और दलहन के रकबे में वृद्धि हुई है, वहीं गेहूं का रकबा पिछली वर्ष के मुकाबले कुछ घटा है।
जिले में अब तक कुल 3 लाख 68 हजार हेक्टेयर में बोवनी पूरी हो चुकी है। इसमें सबसे अधिक रकबा गेहूं का है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 2 लाख 37 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जौ में 9 हजार, चना में 41 हजार, सरसों में 40 हजार, मटर में 31 हजार और अलसी में डेढ़ हजार हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है। यानि कि दलहन और तिलहन की लगभग 90 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है।
इस साल जिले में कुल रकबा 4 लाख 80 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। गेहूं की बोवनी का लक्ष्य 3 लाख 18 हजार हेक्टेयर रखा गया था, जबकि पिछले साल यह 3 लाख 28 हजार हेक्टेयर था। जौ की खेती 10 हजार हेक्टेयर में की जा रही है। कृषि विभाग का प्रयास है कि किसानों को बोवनी में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
इस वर्ष रबी सीजन के लिए जिले में 74 हजार 500 मीट्रिक टन खाद की मांग की गई थी। अब तक 71 हजार 500 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध कराई जा चुकी है। वितरण की स्थिति देखें तो अब तक 49 हजार 256 मीट्रिक टन खाद किसानों को बांटी जा चुकी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार ने किसानों से सलाह दी है कि मात्रा के अनुसार ही खाद का उपयोग करें और बोवनी का समय न चूकें। उन्होंने बताया कि जिले में बीज और खाद की कोई कमी नहीं है, इसलिए किसान अपनी जमीन खाली न छोड़ें और अधिक से अधिक फसल बोवनी करें।
कृषि विभाग के डॉ. रवीश सिंह, उप संचालक, ने कहा कि किसानों को बोवनी से पहले बीज का परीक्षण करना चाहिए। पौधों के पोषक तत्वों के लिए नैनो डीएपी का उपयोग बहुत लाभकारी है। उन्होंने कहा कि सीजन में दिन-रात मेहनत करके किसानों को बोवनी पूरी करनी होगी। सभी फसलों के लिए यही उत्तम समय है। इस प्रकार जिले में रबी सीजन की तैयारी पूरी तरह से नियंत्रण में है और 10 दिसंबर तक गेहूं सहित सभी फसलों की बोवनी पूरी होने की संभावना है।
Published on:
20 Nov 2025 10:34 am
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