
श्रीगंगानगर। साइबर ठगी, हवाला ट्रांजैक्शन और फर्जी बैंकिंग नेटवर्क की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। जवाहरनगर पुलिस की गिरफ्त में आए गिरोह के तीन सदस्यों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी अब तक 200 से अधिक बैंक खातों को किराए पर ले चुके हैं। इनमें से 150 खातों की पूरी किट एटीएम, पासबुक, चेकबुक बरामद हो चुकी है, जबकि लैपटॉप में दर्ज खातों की अलग-अलग फाइलों की छानबीन जारी है। जांच अधिकारी जवाहरनगर सीआई देवेंद्र सिंह ने बताया कि 10 बैंक खातों में जमा 28 लाख रुपए को होल्ड कराया गया है। पुलिस ने छापों के दौरान 21.10 लाख रुपए नगद, 21.514 किलो चांदी, 90 चेकबुक, 64 एटीएम व डेबिट कार्ड, 44 सक्रिय व लूज़ सिम, आधार-पैन कार्ड, 12 रबर स्टांप, 23 बिल बुक, लैपटॉप और फर्जी फर्मों के जीएसटी दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस ने गुरुवार को गिरोह के तीनों सदस्यों आरोपी चंद्रकुमार बंसल, संदीप चौहान और दीपक को अदालत में पेश किया गया, जहां से सात दिन का रिमांड हासिल किया।
प्राइवेट बैँक खाता धारक को प्राथमिकता
जांच अधिकारी ने बताया कि इस गिरोह के निशाने पर प्राइवेट बैंक के खाता धारक थे। अब तक बरामद किए गए बैँक खातों की डिटेल में ज्यादातर प्राइवेट बैंक है। श्रीगंगानगर के बारह बैंकों में खोले गए इन खातों में करोड़ों रुपए का लेनदेन सामने आ सकता है। इस संबंध में बैंक अधिकारियों को इसकी डिटेल उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। गिरोह ने इन खाता धारकों को पांच से पन्द्रह हजार रुपए का लालच देकर किराया दिया जाता। इन धारकों से एटीएम, पास बुक और चेकबुक के अलावा क्रेडिट कार्ड आदि दस्तावेज लेकर इनकी एक किट बनाई जाती, इस किट का दाम पचास हजार रुपए प्रति किट की दर से उन लोगों को बेची जाती जो साइबर ठगी, हवाला, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े संदिग्ध लेन-देन करते है।
इस फ्रॉड गिरोह का दायरा विदेशों तक
जांच अधिकारी ने बताया कि इस फ्रॉड गिरोह का संबंध में विदेशों तक होने की संभावना है। साइबर ठगी, हवाला, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लोग ज्यादातर मेट्रो सिटी और विदेशों में है, ऐसे में यह संभावना है कि विदेशों में बैठे हैंडलर इन खातों की निगरानी कर रहे थे। आरोपी चन्द्रकुमार बंसल के जिम्मे ऐसी रकम को बैँक खातों में जमा कराने के लिए साइबर ठग, हवाला, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर ठगी करने वालों से संपर्क साधता था। जबकि आरोपी संदीप और दीपक प्राइवेट बैँक में खाता खुलवा चुके बुजुर्ग, जरुरतमंद और महिला आदि को किराये के लिए बैँक खाता देने के लिए काम करते थे।
होल्ड राशि ‘क्लीयर’ कराने का भी था सेटअप
जांच अधिकारी ने बताया कि रकम होल्ड होने की स्थिति में आरोपी अपनी फर्जी जीएसटी फर्मों के बिल दिखाकर बैंक को भुगतान को ‘जेन्युइन’ साबित कर देते थे। पुलिस ने 12 फर्जी जीएसटी फर्मों के बिल, नाम, नंबर, मुहर और दस्तावेज भी जब्त किए हैं।
Published on:
28 Nov 2025 12:09 am
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