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झुंझुनूं की सड़कों पर मौत का साया: डेढ़ दर्जन ब्लैक स्पॉट बन गए जानलेवा जाल

झुंझुनूं में करीब डेढ़ दर्जन ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, मगर सुधार का बजट सिर्फ तीन पर मिला है। बाकी जगहों पर हादसे रोज़ाना ज़िंदगी और मौत का खेल खेल रहे हैं।

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झुंझुनूं जिले की सड़कों पर हर मोड़ पर मौत घात लगाए बैठी है। पिछले कुछ महीनों में यहां हुए सड़क हादसों ने न जाने कितने घरों के चिराग बुझा दिए। प्रशासनिक लापरवाही ऐसी कि सवाल उठता है — आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार? जिले के ब्लैक स्पॉट अब ब्लड स्पॉट में बदल चुके हैं। सरकारी रिकॉर्ड बताता है कि झुंझुनूं में करीब डेढ़ दर्जन ब्लैक स्पॉट चिन्हित हैं, मगर सुधार का बजट सिर्फ तीन पर मिला है। बाकी जगहों पर हादसे रोज़ाना ज़िंदगी और मौत का खेल खेल रहे हैं। सरकार ने हाल ही में तीन ब्लैक स्पॉट्स के लिए कुल 3.85 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, और ये तीनों उदयपुरवाटी विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। इनमें स्टेट हाइवे 37 पर कॉलेज बस स्टैंड बड़ागांव के लिए 1.55 करोड़ रुपए, जमात उदयपुरवाटी के लिए 1.20 करोड़ रुपए और झड़ाया नगर के लिए 1.10 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। लेकिन सवाल वही है — बाकी खतरनाक जगहों पर कब सुधरेगा हालात?

चार काले धब्बे, जहां सड़क बन चुकी है मौत की गली

झुंझुनूं जिले में चार प्रमुख स्थान ऐसे हैं जहां सड़कें अब हादसों की प्रतीक बन चुकी हैं। लीला की ढाणी हुक्मपुरा, नृसिंहपुरा, बड़ागांव, भोदन पुलिया सिंचाना। इन जगहों पर सड़क का असमान स्तर, अंधे मोड़, अतिक्रमण, ट्रैफिक लाइट का अभाव और खराब जंक्शन व्यवस्था रोजाना हादसों को न्योता देती हैं।

जानिए — जिले के डेथ ज़ोन कहे जाने वाले ब्लैक स्पॉट

-गुढ़ागौडजी: स्टेट हाइवे 37 - कॉलेज स्टैंड बड़ागांव, लीला की ढाणी हुक्मपुरा, महला की ढाणी स्टैंड टोटनवाड़, पोषाणा टोल के पास

-गुढ़ागौडजी-नवलगढ़ मार्ग: पाबूजी मंदिर के पास भोड़की

-चिड़ावा: स्टेट हाइवे 11 - ओजटू, नेशनल हाइवे 11 - लाखू

-उदयपुरवाटी: स्टेट हाइवे 37 - छापोली, जमात कस्बा, झड़ाया नगर, इंदपुरा स्टैंड

-बगड़: नेशनल हाइवे 11 - बुडाना से बख्तावरपुरा काटली नदी, स्टेट हाइवे 8 - नूनियां गोठड़ा

-मुकुंदगढ़: स्टेट हाइवे 8 - घोडीवारा तिराहा

-झुंझुनूं: नेशनल हाइवे 11 - बीड़, स्टेट हाइवे 37 - उदावास

-पिलानी: नेशनल हाइवे 709 - पीपली

-सूरजगढ़: स्टेट हाइवे 8 - सूरजगढ़ बाइपास चिड़ावा

जनता का सवाल: आखिर कितनी मौतों के बाद होगा सुधार?

लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा न हो, तब तक विभाग के अधिकारी हरकत में नहीं आते। कई जगहों पर सड़क सुधार की फाइलें महीनों से दफ्तरों में धूल फांक रही हैं। झुंझुनूं की सड़कें अब सवाल पूछ रही हैं क्या अगला नंबर किसी और मासूम का है?


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