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सुशीला कार्की पर जेन-जी का प्रेशर, पूर्व PM ओली और उनके मंत्रियों को जेल में डालने की मांग तेज

नेपाल में जेन जी ने अतंरिम सरकार से मांग की है कि पूर्व पीएम ओली समेत भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं को जल्द से जल्द जेल में बंद किया जाए। सुशीला कार्की की सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह नेपाल में कानून का राज स्थापित करेगी।

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Sushila Karki

सुशीला कार्की (फोटो- एक्स अकाउंट @RONBupdates)

नेपाल (Nepal) में भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद अब अपनी ईमानदारी के चलते प्रधानमंत्री चुनी गईं सुशीला कार्की (Sushila Karki) अब सार्वजनिक जीवन की सबसे कठिन चुनौती का सामना कर रही हैं। यह चुनौती है पूर्ववर्ती सरकार को अपदस्थ करने वाले प्रदर्शनकारियों की मांगों को पूरा करते हुए छह महीने में चुनाव कराना है। जेन-Z प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि देश के सभी नेताओं, विशेषकर हाल में अपदस्थ सरकार के नेताओं और उनके साथ सांठगांठ में शामिल शीर्ष भ्रष्ट अधिकारियों को तत्काल जेल में ठूंस दिया जाए।

कानून का राज स्थापित करने के लिए सबकुछ करुंगी: कार्की

गौरतलब है कि कार्की कह चुकी हैं कि देश में कानून का शासन स्थापित करने के लिए वो सबकुछ करेंगी। भ्रष्ट लोगों पर एक्शन लिया जाएगा, लेकिन प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं। रोज नई शर्तें रखते हुए उनको तत्काल पूरा करने की मांग रख रहे हैं। जेन-जी नेता सुदन गुरुंग ने ताजा सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि केपी शर्मा ओली सरकार के सभी मंत्रियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। हमारी सबसे पहली डिमांड यही है कि करप्शन को अगर देश से खत्म करना है तो नेताओं को जेल भेजना होगा।

कार्की हमारी मां हैं

पीएम सुशीला कार्की हमारी मां हैं और हम मानते हैं कि वह हमारी रक्षा करेंगी। गौरतलब है कि सुदन गुरुंग एक एनजीओ हामी नेपाल के संस्थापक हैं। वे कहते हैं कि ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के 2024 करप्शन परसेप्शन्स इंडेक्स में नेपाल 180 देशों में 107वें स्थान पर पहुंच गया, ये सब नेताओं की वजह से हुआ।

हालांकि नेपाल के जेन जी अब भी कार्की का समर्थन करते हैं, जिन्होंने नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश के रूप में भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता दिखाई, लेकिन वे उनके नेतृत्व में गठित नई सरकार के कामकाज के परिणामों के लिए भी अधीर हैं।

प्रदर्शनों की जांच के लिए तीन सदस्यीय आयोग गठित

सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली नेपाल की अंतरिम सरकार ने 'जेन जी' के विरोध प्रदर्शन और उन पर गोली चलाए जाने के आदेश की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जिसमें 72 लोग मारे गए थे और केपी शर्मा ओली सरकार को गिरा दिया गया था।

गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल ने सिंह दरबार सचिवालय में संवाददाताओं को बताया कि पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की के अलावा पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक ज्ञान रण शर्मा और कानूनी विशेषज्ञ बिश्वेश्वर प्रसाद भंडारी जांच आयोग के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि जांच आयोग को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का अधिकार है। गौरतलब है कि 8 और 9 सितंबर को काठमांडू में प्रदर्शनकारियों की हत्या की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच आयोग का गठन, जेन जेड समूह की प्रमुख मांगों में से एक थी।

फिर सरकार पलटने की धमकी

सुदन गुरुंग से जब पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि यह आंदोलन फेल हो जाएगा? इस पर गुरुंग ने कहा, फेल होने की कोई गुंजाइश नहीं है। कार्की को 6 महीने का वक्त दिया गया है और यह अच्छा समय है। सुदन गुरुंग ने धमकी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं पूरी की गई तो वह सुशीला कार्की सरकार को भी गिरा देंगे। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी सारी डिमांड पूरा करेगी। कुछ पर काम भी शुरू हो गया है। गुरुंग ने कहा, प्रधानमंत्री ने एंटी करप्शन कमेटी बनाने का वादा किया है, हमले की जांच के लिए पैनल बनाया है, यह अच्छा कदम है।

ओली की गिरफ्तारी पर भड़क सकता है विद्रोह

नेपाल के पूर्व आर्मी जनरल बिनोज बस्नेत ने कहा है ओली जैसे ताकतवर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से बवाल हो सकता है। ओली आज भी नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड मार्क्सवादी–लेनिनवादी) के अध्यक्ष हैं। उन्हें देश में मजबूत समर्थन मिला हुआ है। जहां अन्य दलों नेता शांति में यकीन रखते हैं, वहीं ओली की पार्टी सड़कों पर उतर सकती है।

नेपाल फिर एक नए मोड़ पर, 2008 जैसे हालात

जानकारों का मानना है कि नेपाल फिर 2008 जैसे सियासी मोड़ पर खड़ा हुआ है। उस समय माओवादी आंदोलन ने राजशाही को उखाड़ फेंका था। जिसके बाद एक दशक से अधिक समय तक अशांति रही, सरकार अस्थिर रही और अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई। तब से नेपाल में 14 सरकारें बदल चुकी हैं।

लगातार विद्रोह की वजह से गरीब-अमीर की खाई बढ़ रही है। बेरोजगारी दर 20% से ज्यादा हो चुकी है। नेपाल से युवाओं का पलायन बढ़ता ही जा रहा है। नेपाल की युवा आबादी का एक तिहाई हिस्सा नौकरी के लिए देश छोड़ चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर कार्की प्रयोग सफल नहीं हुआ तो आने वाले वक्त में ऐसी सरकार बनना मुश्किल हो जाएगा, जिस पर सब भरोसा कर सकें। इससे देश दशकों तक अशांति में फंस सकता है।