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मण्डी में बरसात से बचाने के लिए तिरपालों से ढंकनी पड़ी जिंस

जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू एवं जमवारामगढ़ उपखण्ड क्षेत्रों में गुरुवार सुबह से ही मौसम का मिजाज बदल गया। मण्डी में जिंसों को भीगने से बचाने के लिए जिंसों को तिरपालों से ढंकना पड़ा। रात से छाए बादलों के बीच सुबह होते ही रिमझिम बरसात का दौर शुरू हो गया, जो दिनभर रुक-रुक कर जारी रहा। आकाश में बादल इस कदर छाए रहे कि सूर्यदेव भगवान ने पूरे दिन दर्शन नहीं दिए।

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बस्सी @ पत्रिका. जयपुर ग्रामीण के बस्सी, चाकसू एवं जमवारामगढ़ उपखण्ड क्षेत्रों में गुरुवार सुबह से ही मौसम का मिजाज बदल गया। मण्डी में जिंसों को भीगने से बचाने के लिए जिंसों को तिरपालों से ढंकना पड़ा। रात से छाए बादलों के बीच सुबह होते ही रिमझिम बरसात का दौर शुरू हो गया, जो दिनभर रुक-रुक कर जारी रहा। आकाश में बादल इस कदर छाए रहे कि सूर्यदेव भगवान ने पूरे दिन दर्शन नहीं दिए। सर्द हवाओं के बीच लोगों ने सर्दी का अहसास किया और गर्म कपड़ों की तलाश बढ़ गई।

बरसात के साथ तापमान में गिरावट आने से खेतों में रबी फसलों के लिए अनुकूल माहौल बन गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह मावठ किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। खेतों में बोई गई चना, सरसों व जौ की फसलों को इससे भरपूर नमी मिलेगी। वहीं तापमान गिरने से गेहूं की बुवाई का कार्य भी तेजी पकड़ चुका है। किसान अब फसलों की अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

इधर, मौसम में आई ठंडक से बाजारों में गर्म कपड़ों की बिक्री भी बढ़ गई है। बस्सी, चाकसू व जमवारामगढ़ कस्बों के बाजारों में ऊनी वस्त्रों की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ गई है। लोग स्वेटर, जैकेट, मफलर और कम्बल की खरीदारी कर रहे हैं।