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पीड़ा: प्रदेश में चिप और कार्टेज में अटकी टीबी रोग की जांच

सीकर. प्रदेश में टीबी जांच की रीढ़ मानी कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (सीबीनॉट) और ट्रूनॉट मशीनें एक माह कार्टेज और चिप की गंभीर कमी से जूझ रही हैं। हाल यह है कि टीबी मुक्त अभियान पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद प्रदेश में जांच की रफ्तार 40 से 50 प्रतिशत तक घट चुकी है।

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सीकर. प्रदेश में टीबी जांच की रीढ़ मानी कार्ट्रिज आधारित न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्ट (सीबीनॉट) और ट्रूनॉट मशीनें एक माह कार्टेज और चिप की गंभीर कमी से जूझ रही हैं। हाल यह है कि टीबी मुक्त अभियान पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद प्रदेश में जांच की रफ्तार 40 से 50 प्रतिशत तक घट चुकी है। कई जिलों में जांच मशीन कार्टेज नहीं मिलने के कारण पूरी तरह रुक गई है। इसका नतीजा है कि एक ओर जहां टीबी के मरीजों की जांच लंबित होने लगी है और मरीजों में अन्य बीमारियों का संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है । गौरतलब है कि अकेले सीकर जिले में जांच के लिए हर सप्ताह करीब 5,000 कार्टेज की आवश्यकता होती है, जबकि हाल ही में महज 600 कार्टेज ही सप्लाई हुए। जबकि प्रदेश में हर सप्ताह डेढ लाख से ज्यादा कार्टेज की जरूरत पड़ती है। अधिकारियों की माने तो टीबी जैसे रोग को लेकर इस प्रकार सीकर सहित प्रदेश को टीबी मुक्त राजस्थान बनाने का लक्ष्य कमजोर पड़ता दिख रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों प्रदेश में अभियान के दौरान करीब 74 लाख लोगों की स्क्रीनिंग हुई थी। इसमें दो लाख से ज्यादा मरीजों में टीबी के लक्षण मिले थे।

जिले की स्थिति

जिले में हर महीने औसतन 800 सक 900 संदिग्ध टीबी मरीज जांच के लिए आते हैं। टीबी क्लीनिक में जांच न होने से 300 मरीजों की रिपोर्ट लंबित है। इससे मरीजों को भी परेशानी हो रही है। इधर चिकित्सकों के अनुसार देरी से जांच होने के कारण टीबी से अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा

यूं बढ़ रही परेशानी

चिकित्सकों के अनुसार टीबी रोग की सटीक पहचान के लिए सबसे ज्यादा जरूरी सीबीनॉट और ट्रूनॉट जांच होती है। ये जांच नहीं होने से टीबी के संभावित मरीजों की पहचान में देरी होती है। टीबी के मरीजों में एमडीआर टीबी की पहचान सीबी नॉट टेस्ट के जरिए ही हो सकती है। इसके अलावा टीबी रोग की पहचान समय पर होने से मरीज की रिकवरी भी जल्दी होती है। इसके अलावा जांच नहीं होने से कई बार अनुमान के आधार पर उपचार किया जाता है। इससे मरीज की सेहत को नुकसान होता है। गौरतलब है कि प्रदेश में दिल्ली सैंट्रल टीबी डिवीजन से प्रदेश स्तर पर किट की सप्लाई की जाती है।

जांच बाधित हो रही हैै

सीबीनॉट और ट्रूनॉट जांच के लिए केन्द्र सरकार की ओर से चिप और कार्टेज की सप्लाई दी जाती है। एक माह से सप्लाई नहीं होने के कारण सीकर सहित प्रदेश में कई जगह ये जांच बाधित हो रही है। हाल में महज छह सौ कार्टेज ही मिल सके है जबकि अकेले सीकर जिले में हर सप्ताह पांच हजार कार्टेज की जरूरत है। इसके लिए मुख्यालय को लिखा गया है।

डॉ. रतनलाल, जिला क्षय रोग अधिकारी, सीकर