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Chanakya Niti: इस तरह से दान करने पर हो जाएंगे कंगाल, भिखारियों से भी बदतर हो जाएगी जिंदगी

Chanakya Niti: चाणक्य नीति के अनुसार, दान हमेशा अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। हैसियत से बढ़कर दान व्यक्ति को नुकसान, गरीबी और संकट में डाल सकता है। विवेकपूर्ण दान ही सच्चा और लाभकारी माना जाता है।

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भारत

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Astrodesk

Nov 29, 2025

Chanakya Niti

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Chanakya Niti:आचार्य चाणक्य नीतियों में कई ऐसी चीजों के बारे में बताया है जो एक व्यक्ति को जीवन जीने, समाज में रहने जैसे नियमों के बारे में बताते हैं। चाणक्य नीति में आपको हर तरह की चीज के बारे में पढ़ने के लिए मिल जाएगा। चाणक्य (Chanakya Niti) की इन नीतियों में दान को लेकर भी एक बात कही गई है।

ऐसे बहुत से लोग हैं जो जरूरत से ज्यादा दान करते हैं। जिसे चाणक्य ने सही नहीं माना है। यूं तो दान करना काफी अच्छा होता है लेकिन जरूरत से ज्यादा जो व्यक्ति दान करता है उसे कई तरह की दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में चाणक्य ने चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति को हमेशा सोच समझकर ही दान करना चाहिए। आइए जानते हैं किस तरह के दान (Donation) को चाणक्य ने खराब बताया है-

उचित दान वही, जो आपकी क्षमता के अनुरूप हो

दुनिया भर में आप जिस भी धर्म को फॉलो करते हो, सभी में दान को पुण्य माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि दान करने से व्यक्ति धनवान और भाग्यवान बनता है और उसके घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। लेकिन चाणक्य का कहना है कि दान करना तभी अच्छा माना जाता है जब आपके पास दान करने की क्षमता हो। अगर आप अपनी क्षमता से ज्यादा दान करते हैं तो आपको संकट का सामना करना पड़ता है।

अपनी हैसियत से ज्यादा दान करने का मतलब बर्बादी की शुरुआत

चाणक्य का कहना है कि व्यक्ति को दान करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन जरूर कर लेना चाहिए। कई लोग भावनाओं में बहकर, दिखावे के चक्कर में, या समाज में इज्जत पाने के लिए अपनी पूरी कमाई दान कर देते हैं। ऐसा करने से उनकी धन-संपत्ति धीरे-धीरे खत्म हो सकती है और भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें व्यक्ति ने पैसा होने पर अंधाधुंध दान किया और उसके बाद आगे आने वाले समय में दरिद्रता, कर्ज और गरीबी का सामना करना पड़ा।

चाणक्य का कहना है कि अपनी पूरी कमाई को दान पर लुटा देना सही नहीं होता है। इस तरह के काम करने से व्यक्ति गिरता चला जाता है और उसे उठाने के लिए फिर किसी और व्यक्ति की जरूरत पड़ती है। ऐसे में वह भिखारियों से भी बदतर जीवन जीता है।

दान से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और भविष्य का सोचें

चाणक्य नीति के अनुसार, दान उतना ही करना चाहिए जितना आप बिना संकट में पड़े दे सकें। दान हमेशा विवेक, बुद्धि और अपनी आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। धन-संपत्ति का संरक्षण करना बुद्धिमानी है, क्योंकि जब आपके पास पर्याप्त संसाधन होंगे तभी आप आगे भी दान करने में सक्षम रहेंगे। चाणक्य स्पष्ट कहते हैं कि दान का उद्देश्य दूसरों की मदद के साथ-साथ स्वयं को सुरक्षित रखना भी होना चाहिए। अंधा दान कभी भी शुभ परिणाम नहीं देता।


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