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प्रसंगवश: लिफ्ट-एस्केलेटर के लिए नियम तो बना दिए, अमल में कब लाएंगे

रायपुर में हाउसिंग बोर्ड के आवासीय कॉम्पलेक्स में हुआ लिफ्ट हादसा

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Raipur

राजधानी रायपुर के डीडीनगर इलाके में हाउसिंग बोर्ड के आवासीय कॉम्पलेक्स इंद्रप्रस्थ फेज-2 में लिफ्ट की वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया। ग्राउंड फ्लोर पर एक महिला ने लिफ्ट का बटन दबाया, उसे सेकंड फ्लोर पर जाना था। अभी लिफ्ट का ग्रिल वाला गेट ठीक से खुल भी नहीं पाया था, लिफ्ट चालू हो गई और आठवीं मंजिल पर तेजी से जाकर टकरा गई। चूंकि महिला लिफ्ट में सवार नहीं हो सकी थी, तो बड़ा हादसा टल गया और वह बाल-बाल बच गई। इस घटना से मेंटेनेंस संबंधी बड़ी चूक सामने आई है। इससे पहले भी रायपुर, भिलाई सहित और जगहों पर लिफ्ट हादसे हो चुके हैं। इनमें जान-माल का नुकसान भी हो चुका है।

इन हादसों से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में इसी साल अप्रैल में लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया था। सरकार ने सभी लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण अनिवार्य कर दिया, ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नियम के तहत लिफ्ट और एस्केलेटर का संचालन उच्च सुरक्षा मानकों के अनुसार जरूरी है। प्रदेशभर में व्यावसायिक और आवासीय भवनों, शॉपिंग मॉल्स तथा मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में तकरीबन 1.50 लाख लिफ्ट लगी हुई हैं। नए नियम को लागू हुए छह महीने होने जा रहे हैं, लेकिन 95 प्रतिशत से अधिक लिफ्ट में विभाग की न तो कोई जांच की रिपोर्ट चस्पा की गई है और न ही कोई फोन नंबर। लिफ्ट खराब होने पर लोगों की सुरक्षा का कोई भरोसा नहीं है। जबकि लिफ्ट और एस्केलेटर से जुड़ी सेवाओं को लोक सेवा गारंटी में शामिल करने से यह माना जा रहा था कि दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा। लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। लिफ्ट की नियमित जांच को लेकर अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।

सरकार को चाहिए कि जनहित और जनसुरक्षा को लेकर बनाए गए नियमों पर सरकारी अमले द्वारा अमल किया जा रहा है या नहीं, इसकी नियमित मॉनीटरिंग करे। साथ ही कुछ ऐसे नियम भी बनाए जाएं कि हर छह महीने या सालभर में लिफ्ट के रखरखाव को लेकर ऑनलाइन स्व-घोषणा-पत्र भरें। संबंधित विभाग औचक निरीक्षण और सतत निगरानी करे। आखिर सवाल लोगों की जान-माल की सुरक्षा का जो है।

-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com