
विजय माल्या ने कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर की याचिका (ANI)
भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर बैंकों द्वारा उनके लोन डिफॉल्ट से जुड़ी अब तक जब्त की गई संपत्तियों और बकाया कर्ज का विस्तृत विवरण मांगा है। याचिका में माल्या ने यह भी मांग की है कि वसूली हो चुकी राशि पर बैंकों को ब्याज लगाना बंद कर देना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ललिता कन्नेगंती की सिंगल जज बेंच ने सुनवाई 12 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सजन पूवय्या ने अदालत में दलील दी कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही कार्यवाहियों के कारण माल्या की संपत्तियां कुर्क की गईं, लेकिन अब तक करीब 10,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है। उन्होंने कहा, "जितना बकाया था, उससे कहीं अधिक राशि वसूल ली गई है। अब माल्या बैंकों से अब तक की गई वसूली का विस्तृत ब्योरा और ब्याज का हिसाब मांग रहे हैं।"
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान माल्या की याचिका पर सवाल उठाए। जस्टिस कन्नेगंती ने पूवय्या से पूछा, "आपने कंपनी कोर्ट में याचिका क्यों नहीं दायर की? बैंकों से इस तरह के वित्तीय विवरण की मांग रिट याचिका के जरिए कैसे की जा सकती है?" पूवय्या ने जवाब दिया कि हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करना माल्या का संवैधानिक अधिकार है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि माल्या अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए और देशभर में चल रही विभिन्न अदालती कार्यवाहियों में भी उनकी अनुपस्थिति रही है। ऐसे में उन्होंने सवाल किया कि माल्या रिट याचिका दायर करने का अधिकार कैसे मांग सकते हैं?
बैंकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम हुईलगोल ने कड़ी दलीलें देते हुए कहा कि माल्या देश से भागकर भगोड़ा बन चुके हैं। अगर वे वाकई निर्दोष हैं, तो भारत लौटकर न्यायिक प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहिए था। इसके बजाय, वे केवल अपनी सुविधा के अनुसार अदालत में पेश होते हैं। हुईलगोल ने जोर देकर कहा कि सभी वसूलियां तब तक प्रावधानिक मानी जाएंगी, जब तक माल्या अदालत की क्षेत्राधिकार स्वीकार न करें।
जज ने बैंकों के अधिवक्ता को अपनी आपत्तियां दायर करने का निर्देश दिया और मामले को 12 नवंबर के लिए टाल दिया। यह याचिका किंगफिशर एयरलाइंस और यूनाइटेड ब्रेवरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूबीएचएल) से जुड़े लोन रिकवरी के सिलसिले का हिस्सा है, जहां डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) द्वारा अप्रैल 2017 में संशोधित वसूली प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये का लोन डिफॉल्ट का आरोप है, जिसके चलते वे 2016 से ब्रिटेन में रह रहे हैं। ईडी और सीबीआई द्वारा उनकी प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। यह नवीनतम घटना माल्या के वित्तीय विवादों में नया मोड़ जोड़ती है, जहां वे अब वसूली से अधिक राशि का दावा कर रहे हैं।
Updated on:
05 Nov 2025 09:25 am
Published on:
05 Nov 2025 09:24 am
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