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सरकार खुद तोड़ रही अपने ही नियम, सरकारी वाहनों का न बीमा, न फिटनेस

आमजन के लिए जरूरी है वाहन का बीमा, बिना बीमा न होता रजिस्ट्रेशन और ही मिलती डिलीवरी, सरकारी वाहनों का बीमा करवाने से खुद सरकार कर रही परहेज, दुर्घटना होने पर नहीं मिलता क्लेम

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कलक्टर की कार का न बीमा, न फिटनेस

कलक्टर की कार का न बीमा, न फिटनेस

नागौर. राजस्थान सहित देश के ज्यादातर राज्यों में सरकारी विभागों के हजारों वाहन वर्षों से बिना बीमा चल रहे हैं। इनमें से कई वाहन फील्ड वर्क, निरीक्षण, पुलिस गश्त या अधिकारी परिवहन में रोजाना उपयोग होते हैं। सरकार आमजन को बीमा नियमों का सख्ती से पालन करने को कहती है, बिना बीमा के निजी वाहन का रजिस्ट्रेशन, फिटनेस या डिलीवरी तक नहीं होती, लेकिन विडंबना यह है कि सरकारी विभागों के वाहन बिना बीमा चल रहे हैं।

परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बात सही है कि आम नागरिकों के लिए मोटर वाहन बीमा (विशेषकर थर्ड पार्टी इंश्योरेंस) अनिवार्य है, जबकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146(2) के तहत सरकारी विभागों के स्वामित्व वाले वाहनों को इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। सरकार ने कानून में जहां आम नागरिकों के लिए बीमा कानूनी अनिवार्यता कर रखी है, वहीं सरकारी वाहनों को छूट दे रखी है।

कलक्टर की कार का न बीमा, न फिटनेस

नागौर जिला कलक्टर की कार नम्बर आरजे 21 यूबी 6564 का दिसम्बर 2019 में परिवहन विभाग में दिसम्बर 2019 में पंजीयन किया गया। इस कार का बीमा तो दूर फिटनेस व पीयूससी भी करीब पौने चार साल पहले खत्म हो चुका है। यही हाल जिले के अन्य अधिकारियों के वाहनों का है। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि ‘वाहन चाहे किसी का भी हो, सार्वजनिक सडक़ पर चलता है तो मोटर बीमा अधिनियम लागू होना चाहिए।’

दो साल पहले एसपी की गाड़ी से घायल हुई थी बालिका

तत्कालीन नागौर पुलिस अधीक्षक नारायण टोगस की कार से टकराकर करीब दो साल पहले लाडनूं रोड पर 7 साल की बालिका गंभीर घायल हो गई थी। टोगस उस समय सुरपालिया थाने का निरीक्षण कर लौट रहे थे, बुरड़ी गांव में एसपी की कार ने बच्ची को टक्कर मार दी। हादसे में बच्ची कुसुम गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसे गंभीर हालत में जोधपुर रेफर किया गया था।

सरकार के नियम आमजन के लिए, खुद के लिए नहीं

- आरटीओ में निजी वाहनों के लिए बिना बीमा रजिस्ट्रेशन असंभव।

- सरकारी वाहनों का रिन्यूअल व उपयोग बिना बीमा जारी।

- ट्रैफिक पुलिस को भी जांच का अधिकार नहीं क्योंकि ‘सरकारी वाहन’ हैं।

- एक बार सरकारी वाहन खरीदने के बाद न तो उसका फिटनेस होता है और न ही पीयूसीसी।

सडक़ पर नहीं चल सकता बिन बीमा का वाहन

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 के अनुसार, ‘किसी भी वाहन को सार्वजनिक मार्ग पर बिना वैध बीमा के नहीं चलाया जा सकता।’ बिना वैध बीमा के वाहन चलाने पर मोटर वाहन अधिनियम, 2019 के तहत भारी जुर्माना या कारावास का प्रावधान है। थर्ड पार्टी बीमा का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना की स्थिति में किसी तीसरे व्यक्ति, उसकी संपत्ति या वाहन को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सरकारी वाहनों को बीमा में छूट देना उचित नहीं, क्योंकि दुर्घटनाएं वाहन देखकर नहीं होती। आम नागरिकों से बीमा की जांच हर जगह होती है, लेकिन सरकारी गाडिय़ों पर कोई रोक नहीं है। दुर्घटनाओं में तीसरे पक्ष को नुकसान होने पर राज्य की सीधी जवाबदेही बनती है।

- लिखमाराम भांभू, यातायात सलाहकार, नागौर

क्या कहते हैं डीटीओ

मोटर वाहन अधिनियम में केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले वाहनों को बीमा की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया है। यह व्यवस्था पूरे देश में लागू है। इन वाहनों से दुर्घटना होने पर सरकार स्वयं जिम्मेदार होती है और मुआवजे का भुगतान करती है।

- अवधेश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर