
रामपुर से दूसरे जिलों में सप्लाई की जा रही थी प्रतिबंधित प्रजाति, कार व मोबाइल के साथ बड़ी बरामदगी (फोटो सोर्स : STF office )
STF Busts Major Parrot Smuggling Racket: उत्तर प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण कानूनों के बावजूद लगातार बढ़ रही पक्षी तस्करी पर लगाम कसने के लिए गुरुवार को एक बड़ी सफलता मिली, जब यूपी एसटीएफ और वन विभाग की संयुक्त टीम ने तीन सौ संरक्षित देशी तोतों के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया। प्रतिबंधित प्रजाति के इन पक्षियों को रामपुर जिले के सीबीगंज क्षेत्र से खरीद कर विभिन्न जिलों में सप्लाई करने ले जाया जा रहा था। गिरफ्तार तस्करों की पहचान अर्सलान खान, निवासी बरेली गेट, रामपुर तथा शाकिब, निवासी विलासपुर गेट, रामपुर के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से अवैध वन्यजीव तस्करी के कारोबार में सक्रिय थे और कई बार प्रतिबंधित पक्षियों की सप्लाई कर चुके हैं।
गुप्त सूचना पर संयुक्त टीम की बड़ी कार्रवाई
एसटीएफ के निरीक्षक प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि उन्हें लगातार सूचना मिल रही थी कि रामपुर और आसपास के इलाकों में दुर्लभ और संरक्षित पालतू पक्षियों की बड़ी तादाद में अवैध खरीद-फरोख्त हो रही है। इन सूचनाओं को पुख्ता करने के बाद एसटीएफ और वन विभाग ने एक संयुक्त ऑपरेशन तैयार किया।
गुरुवार को संयुक्त टीम को पता चला कि तस्कर एक कार में प्रतिबंधित रोज़-रिंग्ड (Rose-Ringed Parakeet) प्रजाति के तोतों की बड़ी खेप लेकर दूसरे जिलों की ओर जाने वाले हैं। इस सूचना के आधार पर टीम ने सीबीगंज क्षेत्र में चेकिंग शुरू की और संदिग्ध कार को रोक लिया। जैसे ही कार की तलाशी ली गई, उसमें छुपा कर रखे गए 300 देशी तोते बरामद किए गए। तस्करों ने उन्हें छोटे-छोटे बक्सों और कैरियर में ठूंस रखा था, जिससे कई पक्षियों की हालत भी खराब थी। टीम ने तुरंत दोनों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान तस्करों ने स्वीकार किया कि वे पिछले कई महीनों से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पक्षी सप्लाई कर रहे थे। उन्होंने बताया कि तोतों को ज्यादातर रामपुर, बरेली, पीलीभीत और बदायूं के ग्रामीण इलाकों से कम कीमत पर खरीदा जाता था। बाद में इन्हें लखनऊ, मुरादाबाद, मेरठ, कानपुर व आसपास के शहरों में ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। एक खेप की सप्लाई से 30,000 से 50,000 रुपए का फायदा होता था। तस्करों ने यह भी बताया कि वे सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के जरिए ग्राहकों तक पहुंच बनाते थे। यह नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में काफी सक्रिय हो गया था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन सभी पक्षियों को संरक्षण केंद्र में भेजा गया है, जहाँ उनकी चिकित्सा जांच और पुनर्वास की प्रक्रिया की जाएगी।
भारत में 'रोज़-रिंग्ड पैराकीट' यानी देशी हरा तोता वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची–4 में संरक्षित है। इसकी,खरीद,बिक्री,पालतू के रूप में रखना,परिवहन,व्यापारसब कुछ कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है। फिर भी बाजारों और कुछ जिलों में छिपकर इनकी तस्करी बड़े पैमाने पर की जाती है। गर्मियों और त्योहारों में इनकी मांग और बढ़ जाती है।
एसटीएफ इस कार्रवाई को बड़ी सफलता मान रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और इसके कई साथी अभी फरार हैं। तस्करों के मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक डिटेल्स और संपर्कों की जांच से एक बड़े नेटवर्क के खुलासे की उम्मीद है।
रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर और लखनऊ में नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। टीम अब इन जिलों में भी छापेमारी कर सकती है।
Published on:
28 Nov 2025 09:33 am
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