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Neha Singh Controversy: नेहा सिंह राठौर पर बढ़ते विवादों के बीच तीखा बयान-मैं आवाज हूं, चुप कराना किसी के बस में नहीं

Neha Singh latest updates : लोकप्रिय लोक गायिका नेहा सिंह राठौर लगातार सवाल उठाने, सरकारों की आलोचना करने और सामाजिक मुद्दों को अपनी आवाज देने के कारण विवादों में रही हैं। मुकदमों, डीपफेक वीडियो और राजनीतिक आरोपों का सामना करने के बावजूद वह कहती हैं कि लोकतंत्र में सवाल पूछना उनका अधिकार है और वे पीछे हटने वाली नहीं।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Nov 29, 2025

मुकदमों, धमकियों और डीपफेक के बीच नेहा सिंह राठौर का संघर्ष (फोटो सोर्स : Neha Singh X)

मुकदमों, धमकियों और डीपफेक के बीच नेहा सिंह राठौर का संघर्ष (फोटो सोर्स : Neha Singh X)

Neha Singh Rathore Controversy: लोकतंत्र में सवाल पूछना अधिकार है, और यही अधिकार जब विवादों का केंद्र बन जाए, तो व्यक्ति या तो चुप हो जाता है या और मजबूत होकर खड़ा होता है। लोकप्रिय लोक गायिका और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट नेहा सिंह राठौर दूसरे रास्ते को चुनने वाली शख्सियत हैं। पिछले कुछ वर्षों में वे अपने सवालों, गीतों और स्पष्ट बयानबाजी के कारण लगातार सुर्खियों में रही हैं। आलोचना, विरोध, मुकदमे, डीपफेक वीडियो और राजनीतिक आरोप, सब कुछ झेलने के बावजूद उनका कहना है कि “सवालों से पीछे हटना मेरी फितरत में नहीं है। यही मेरी पहचान है।

आवाज़ उठाने पर जेल में डाल दो,लेकिन मैं चुप नहीं होने वाली”: नेहा का बयान

नेहा कहती हैं,अगर पूछने पर जेल में डालना है तो वह भी कर लें। लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है। प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि उनकी आलोचना कीजिए, और मैं उसी भाव से सवाल करती हूँ। मुकदमों का सामना अलग बात है, पर सवालों से पीछे हटना मेरे स्वभाव में नहीं है। वे स्वीकार करती हैं कि उन्हें बदनाम करने के प्रयास किए गए डीपफेक वीडियो लगाए गए, झूठ फैलाया गया। कई बार मन विचलित हुआ, पर आवाज दबाना मुझे मंज़ूर नहीं। लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी के सेलिब्रिटी गार्डन्स अपार्टमेंट में अपने पति हिमांशु के साथ रहने वाली नेहा लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और सामाजिक मुद्दों से जुड़े प्रश्नों को स्वर देती हैं।

“हर बयान प्रायोजित होता है”-नेहा का जवाब

अक्सर नेहा पर आरोप लगता है कि उनके बयान राजनीतिक रूप से प्रेरित या प्रायोजित होते हैं। इस पर वे बेबाकी से जवाब देती हैं. यह आरोप बेहद सतही और भ्रामक है। जब मैं महंगाई, बेरोजगारी या अन्य मुद्दों पर गीत गाती हूं, इसका मतलब यह नहीं कि कोई मुझे पैसे देकर बोलवा रहा है। जनता के सवालों को प्रायोजित कहना खुद जनता के मुद्दों को कमजोर करना है। नेहा स्पष्ट करती हैं कि वे किसी राजनीतिक दल की प्रवक्ता नहीं हैं,न किसी दल से निर्देश लेती हैं,और न ही किसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं। वे कहती हैं, “मेरा मंच जनता है। मेरे गीत और बयान उसकी पीड़ा और सवालों से उपजते हैं।”

‘कौन सी पार्टी आपको प्रेरित करती है?’- नेहा की स्पष्ट प्रतिक्रिया

इस सवाल पर नेहा दृढ़ता से कहती हैं कि मैं किसी राजनीतिक पार्टी से प्रेरित नहीं हूं। न किसी संगठन से निर्देश पाती हूं। मैं अपनी समझ, अपने अनुभव और समाज की जरूरतों के आधार पर लिखती और गाती हूं। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार ,सत्ता में जो भी है, सवाल तो जनता के प्रतिनिधि के रूप में पूछे जाएंगे। उनका मानना है कि सरकार से सवाल करना लोकतंत्र की नींव है, न कि देशद्रोह।

वह टिप्पणी जिसने अदालत के दरवाज़े तक पहुंचाया

नेहा बताती हैं कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को टैग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था,इतने पर्यटकों की सुरक्षा क्यों नहीं थी। जिम्मेदारी किसकी है। सुरक्षा में कमी का हिसाब कौन देगा।  उनके इन सवालों को कई लोगों ने आपत्तिजनक बताया। सोशल मीडिया पर उनके कुछ वीडियो वायरल हुए और उन पर देशद्रोह जैसी गंभीर धाराओं में शिकायतें दर्ज कर दी गईं। नेहा के अनुसार, मैंने कानूनी सलाह लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन अभी वह राहत नहीं मिली, जिसकी आशा थी। मामला अदालत में चल रहा है और मैं हर कानूनी रास्ता अपनाऊंगी।

डीपफेक और झूठी अफवाहों से परेशान, फिर भी दृढ़

नेहा मानती हैं कि डिजिटल युग में किसी भी जन-प्रतिनिधि, कलाकार या एक्टिविस्ट को बदनाम करना आसान हो गया है। वे कहती हैं कि मेरा डीपफेक वीडियो चलाया गया, झूठे आरोप लगाए गए, ताकि लोग मेरी विश्वसनीयता पर सवाल करें। यह परेशान करने वाला था। लेकिन इन घटनाओं ने मुझे और मजबूत बनाया है।

‘यूपी में का बा…’ से मिली पहचान, पर विवाद भी बढ़े

लोकप्रिय गीत “यूपी में का बा” ने नेहा को रातों रात देशभर में पहचान दिलाई। उनके गीतों का विषय, बेरोजगारी,महंगाई,भ्रष्टाचार, ग्रामीण समस्याएं यही वजह है कि वे प्रशंसा के साथ-साथ सत्ता समर्थकों के निशाने पर भी रहती हैं। नेहा का कहना है, “गाने जनता की आवाज़ हैं। अगर कोई उनसे परेशान होता है, तो इसका मतलब है कि सवाल सही जगह पर लग रहे हैं।”

सवाल पूछने की कीमत-मुकदमे, नोटिस और ट्रोलिंग

नेहा के अनुसार उन पर कई शिकायतें दर्ज की गयी,सोशल मीडिया पर बार-बार ट्रोल किया गया। चरित्र-हनन की कोशिशें हुईं। परिवार तक को निशाना बनाया गया। वे कहती हैं कि परिवार चिंता करता है, लेकिन मैंने फैसला किया है कि डरकर बैठना समाधान नहीं। अपनी आवाज उठाती रहूंगी।

लोकतंत्र में कला और असहमति का महत्व

नेहा मानती हैं कि कलाकार का काम सिर्फ मनोरंजन करना नहीं, बल्कि समाज के सवालों को मंच देना भी है। वे कहती हैं कि लोकतंत्र में विचारों का संघर्ष जरूरी है। अगर सरकार से सवाल पूछने पर लोग जेल जाने लगें, तो यह लोकतंत्र नहीं तानाशाही कहलाएगा।