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‘मैंने खुद बाढ़ के हालात देखे हैं, कई परिवारों का सब कुछ बह गया, संवेदनशीलता से करें सर्वे’: बिरला

कृषि विभाग ने बताया कि अतिवृष्टि से सोयाबीन और उड़द की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बिरला ने निर्देश दिए कि लघु और सीमांत किसानों को एसडीआरएफ नॉर्म्स के तहत अधिक से अधिक मुआवजा दिलाया जाए।

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कोटा

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Akshita Deora

Aug 27, 2025

फोटो: पत्रिका

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित लोगों को अधिक से अधिक राहत मिले, यह प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नुकसान के सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही और चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिरला ने कहा कि मैंने स्वयं प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात देखे हैं, कई परिवारों का सबकुछ बह गया है। ऐसे में प्रभावितों तक त्वरित और संवेदनशीलता के साथ राहत पहुंचाना आवश्यक है।

मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कोटा-बूंदी जिले के अधिकारियों के साथ राहत और आपदा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए बिरला ने कहा कि मकानों, पशुओं और फसलों के नुकसान का सर्वे पूरी ईमानदारी से हो और सभी पात्र प्रभावितों को एसडीआरएफ नॉर्म्स के अनुसार सहायता दी जाए। उन्होंने उपखंड अधिकारियों को निर्देश दिए कि सहायता राशि के आवेदन के समय प्रभावितों से मकान का पट्टा नहीं मांगा जाए, क्योंकि नॉर्म्स में इसका कोई प्रावधान नहीं है। बिरला ने कहा कि प्रयास किए जाएं कि जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें अधिक से अधिक सहायता मिल सके। बर्तन और कपड़ों की क्षति के लिए भी मुआवजा दिलाने का प्रयास हो।

किसानों को अधिक से अधिक मुआवजा

कृषि विभाग ने बताया कि अतिवृष्टि से सोयाबीन और उड़द की फसल को भारी नुकसान हुआ है। बिरला ने निर्देश दिए कि लघु और सीमांत किसानों को एसडीआरएफ नॉर्म्स के तहत अधिक से अधिक मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तत्काल शुरू की जाए, ड्रेनेज सिस्टम चेक किया जाए और बिजली-पानी की व्यवस्था बहाल की जाए। बैठक में लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजीव दत्ता,जिला कलक्टर पीयूष समारिया, बूंदी कलक्टर अक्षय गोदारा, अतिरिक्त आयुक्त, एडीएम और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बूंदी जिले में 213 सड़कें क्षतिग्रस्त

बूंदी जिला कलक्टर अक्षय गोदारा ने बताया कि जिले में अतिवृष्टि के कारण 87 गांव प्रभावित हुए, करीब ढाई हजार लोगों को रेस्क्यू कर 37 राहत शिविरों में ठहराया गया। एसडीआरएफ नॉर्म्स के तहत सहायता के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 213 क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के करीब 4 करोड़ 90 लाख रुपए के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। एसडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त सरकारी परिसंपत्तियों के प्राप्त प्रस्तावों में शिक्षा विभाग के 1254, पंचायती राज विभाग के 183, महिला एवं बाल विकास विभाग के 293 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

सवा सात करोड़ की सड़कें बह गई

कोटा जिले में एसडीआरएफ के तहत क्षतिग्रस्त सरकारी परिसंपत्तियों के प्राप्त प्रस्तावों में शिक्षा विभाग के 1033, चिकित्सा विभाग के 154, महिला एवं बाल विकास विभाग के 341, पंचायत समितियों के 82, सीएडी के 67 तथा अन्य विभागों के 11 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा 421 क्षतिग्रस्त सड़कों के करीब सवा सात करोड़ रुपए के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पशुओं को हुई क्षति के लिए नियमानुसार पशुपालकों को सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

सिर्फ 17 क्षतिग्रस्त

बैठक में एडीएम सीलिंग कृष्णा शुक्ला अपने प्रस्तुतिकरण में बताया कि जिले में अतिवृष्टि से 17 कच्चे एवं एक पक्का मकान पूर्ण क्षतिग्रस्त, 8 पक्के एवं 49 कच्चे मकान अधिक क्षतिग्रस्त तथा 12 पक्के एवं 586 कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इन प्रकरणों में एसडीआरएफ नॉर्म्स के तहत प्रभावितों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

जलभराव का हो स्थायी समाधान


लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कई स्थानों पर पानी की निकासी बंद होने से गांव और बस्तियों में जलभराव हो गया। इसके कारणों का अध्ययन कर स्थायी समाधान सुझाने के लिए उपखंड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में सीएडी, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी और पंचायती राज विभाग की कमेटी गठित की जाए। शहरी क्षेत्रों में भी नगर निगम स्तर पर कमेटी बनाकर पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक उपाय तय किए जाए। बिरला ने कहा कि जलभराव के बाद जिन गांवों में मलबा जमा हुआ है वहां मनरेगा के तहत सफाई करवाई जाए। प्रभावित परिवारों की सूची बने ताकि उन्हें जनसहयोग से भी सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।