
बज्जू के गौशाला में जमा निराश्रित गोवंश।
भागीरथ ज्याणी
बज्जू. (बीकानेर). कस्बे में वर्षों से निराश्रित पशुओं की समस्या से परेशान व्यापारी, युवा व ग्रामीण अब राहत की सांस ले रहे हैं। लंबे समय से कस्बे में स्थायी गोशाला की मांग की जा रही थी। इस मुद्दे को लेकर धीरे-धीरे कारवां जुड़ता गया और अब राजकीय कन्या महाविद्यालय के सामने केशव गोशाला की स्थापना हो गई।
पहले कुछ व्यापारियों की ओर से प्रतिदिन 10 से 50 रुपए तक सहयोग कर अस्थायी गोशाला का संचालन किया जा रहा था। अब कस्बे के व्यापारी, सरकारी कर्मचारी, युवा, जनप्रतिनिधि, ठेकेदार व विद्यार्थी इस मुहिम से जुड़ गए हैं।
व्यवस्थाओं में आई तेजी
गोशाला संचालन के बाद जब व्यवस्थागत परेशानियां सामने आईं, तो ग्राम पंचायत बज्जू और व्यापार मंडल सहित आसपास के गांवों के जनप्रतिनिधि व गोसेवक आगे आए। अब यहां चारा, पशु आवास, कर्मचारियों के लिए शेड, पशुओं के लिए बड़े बर्तन और तारबंदी आदि व्यवस्थाएं पूरी हो चुकी हैं।
व्यापारियों को बड़ी राहत
कस्बे में पहले दो सौ से अधिक निराश्रित पशुधन रोजाना दुकानों के आगे घूमते थे, जिससे व्यापारियों को परेशानी होती थी। सामान खराब होना, राहगीरों को चोट लगना और वाहनों को नुकसान आदि घटनाएं आम थीं। अब गोशाला शुरू होने के बाद इन परेशानियों में काफी कमी आई है। अब गोवंश को गोशाला में भेजने से बाजार में साफ सफाई को लेकर भी राहत मिलेगी।
युवाओं ने चलाए अभियान
कस्बे के युवा और व्यापारी लगातार अभियान चलाकर बाजार से निराश्रित पशुओं को गोशाला तक पहुंचा रहे हैं। अब अधिकांश पशु गोशाला में पहुंच चुके हैं और सफाई व देखरेख के अभियान भी जारी हैं। युवाओं व ग्रामीणों की टीम भामाशाहों से संपर्क कर सहयोग, संचालन को लेकर रणनीति, व्यवस्थाओं का जायजा व समय समय पर श्रमदान करना आदि कार्य करते हैं। पिछले माह तो खेतों में जाकर पशुओं के लिए हरा घास भी स्वयं काटकर लाते थे।
पत्रिका ने उठाया मुद्दा
निराश्रित पशुओं की समस्या को लेकर पत्रिका ने लगातार खबरें प्रकाशित कीं। खबरों के बाद व्यापारियों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस दिशा में कदम उठाया। आज इसी का परिणाम है कि बज्जू में करीब 200 से अधिक पशुओं को नया ठिकाना मिल गया है।
रात में पशु छोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गोशाला संचालकों ने बताया कि कुछ लोग रात में आसपास के गांवों से पशु लाकर बाजार या गोशाला के पास छोड़ देते हैं। अब इस पर रोक लगाने के लिए कैमरे लगाए जा रहे हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मजेदार बात यह है कि लोग बछड़ों तक को गोशाला के आसपास व सड़क पर छोड़ कर जा रहे हैं।
व्यापारी कर रहे सहयोग
गोशाला के संचालन के लिए हर व्यापारी ने मासिक सहयोग देने का निर्णय लिया है। कई दुकानदार समय-समय पर गुड़, लापसी, सब्जियां, तरबूज आदि भी पहुंचाते हैं। ग्रामीण भी जन्मदिन व पारिवारिक कार्यक्रमों पर गोसेवा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Published on:
10 Nov 2025 01:30 am
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