
Fraud Horrific face of digital arrest(फोटो- सोशल मीडिया Modify by patrika.com)
MP news: भोपाल गैस त्रासदी के बाद भोपाल की सड़कों, झीलों और अस्पतालों में पड़े सैंकड़ों शवों का अंतिम संस्कार करने वाले एक 68 वर्षीय वकील ने इस डर से आत्महत्या कर ली कि उसके नाम के साथ कहीं देशद्रोही शब्द का ठप्पा न लग जाए, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो वो इसे सह नहीं पाएगा… यही बात सोचते-सोचते उसने सुसाइड नोट लिखा और अपनी जान दे दी। डिजिटल ठगी का ये नया चेहरा दिल दहला देने वाला है। इतनी अवेयनेस के बाद भी लोग जागरूक नहीं हैं। वहीं डिजिटल ठगी का दहशत पैदा करने वाला ये चेहरा इतना भयावह नजर आ रहा है कि सोचकर ही रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाले सीनियर एडवोकेट शिवकुमार वर्मा ने आत्महत्या कर ली। पुलिस को जांच के दौरान उनके पास से सुसाइड नोट मिला। यह नोट इस बात का गवाह है कि डिजिटल ठग अब सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं उड़ाते, वे लोगों की इज्जत, पहचान और मानसिक शांति के साथ रूह तक को झकझोरने से भी नहीं चूक रहे।
वर्मा ने अपने इस अंतिम पत्र (सुसाइड नोट) में लिखा कि उनके नाम से फर्जी HDFC बैंक अकाउंट खोलकर पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी आसिफ को पैसे भेजे गए। कॉल करने वालों ने उन्हें धमकाया कि उनका नाम अब टेरर फंडिंग से जुड़ चुका है।
'मैं देशद्रोही का ठप्पा लेकर नहीं जी सकता।' यह एक ऐसे इंसान का बयान था, जिसने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी में सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार किया था। जिसने समाज सेवा की, ब्लड डोनेट किया और अपने जीवन को ईमानदारी से जिया। वही इंसान, अचानक सोशल-मिथक में 'देश विरोधी' बना दिया गया।
पुलिस की शुरुआती जांच में यह पूरा मामला डिजिटल फ्रॉड का निकला है। यह वही तकनीक है जिसे अब विशेषज्ञ 'डिजिटल अरेस्ट' कहते हैं। जहां कॉल करने वाले खुद को पुलिस अधिकारी, बैंक वेरिफिकेशन एजेंट या जांच एजेंसी का अफसर बताकर लोगों को डराते हैं, उनका नाम कभी मनी लॉन्ड्रिंग या टेरर केस में आ गया है। ठगों की चाल समझे बिना लोग उनके झांसे में आ जाते हैं और गलत जानकारी पर विश्वास कर लेते हैं। शिवकुमार वर्मा भी ठगों के जाल को देख नहीं पाए। एक वकील होने के बावजूद वे इस तरह का मानसिक दबाव नहीं सह पाए। क्योंकि आतंकवाद जैसे आरोप सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक मौत भी लेकर आ सकते हैं।
इस बार ठगों ने कॉल कर बात शुरू की और एक नई डरा देने वाली कहानी गढ़ी और आखिर में एक निर्दोष को यकीन दिला दिया कि वह देश के खिलाफ खड़ा है।
करीबी कहते हैं, 'वह बातों को मन पर ले लेते थे' वहीं परिवार के अनुसार वर्मा शांत, सिद्धांतों वाले और संवेदनशील स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें किसी ने भी जुबान से कुछ कह दिया, तो वह खुद को साबित करने में लग जाते थे। उनकी यही संवेदनशीलता साइबर अपराधियों का हथियार बन गई। और देशद्रोही कहलाने के डर से उन्होंने मौत का रास्ता चुन लिया।
ये खबर साइबर अपराधियों के शातिर दिमाग की कहानी कह रहे हैं। लोगों की भावनाओं और संवेदना को हथियार बनाकर अब उनसे उनकी जिंदगी छीन रहे हैं। यह खबर नहीं बल्कि एक सबक है.. डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं होता… उससे डरने के बजाय जागरूक रहें और सुरक्षित रहें।
Updated on:
28 Nov 2025 03:55 pm
Published on:
28 Nov 2025 03:52 pm
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