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‘1100 करोड़’ का निवेश, एमपी में होगी ‘बासमती चावल’ की प्रोसेसिंग

MP News: कंपनियां किसानों के खेतों से फसल के साथ ही वेस्ट मटेरियल भी खरीदेंगी। फिलहाल रेट तय करने का काम चल रहा है...

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(Photo Source- Patrika)

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MP News: मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में निजी क्षेत्र द्वारा निवेश के नवाचार पर अमल शुरू हो गया है। प्रदेश में दो कंपनियां 1100 करोड़ का निवेश कर रही हैं। काम अब धरातल पर पहुंच गया है। मैजेस्टिक बासमती राइस प्रालि कंपनी 1000 करोड़ और मशरूम वर्ल्ड द्वारा 100 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह कंपनियां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के साथ मिलकर काम करेंगी।

को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट-पार्टनरशिप मॉडल

कंपनियां किसानों के खेतों से फसल के साथ ही वेस्ट मटेरियल भी खरीदेंगी। फिलहाल रेट तय करने का काम चल रहा है। जल्द ही खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सहकारिता विभाग ने इन दोनों कंपनियों से फरवरी 2025 में राजधानी में हुई ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के दौरान एमओयू किए थे।

सहकारिता में पहली बार को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट-पार्टनरशिप (सीपीपीपी) मॉडल शुरू किया गया है। इसके आधार पर विभाग को पहली बार ही जीआइएस में एंट्री मिली थी। जीआइएस में सहकारिता विभाग ने 2305 करोड़ रुपए के 19 एमओयू किए थे। इनमें से दो पर धरातल पर काम शुरू हुआ है। अन्य में अभी कागजी काम और बातचीत जारी है।

खेतों से पराली एकत्रित करेगी कंपनी

आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प ने बताया कि मशरूम वर्ल्ड ने रायसेन और भोपाल जिलों में सेटअप जमाना शुरू कर दिया है। कंपनी पराली, नरवाई और अन्य कचरे को एकत्रित कर उपयोगी सामग्री बनाएगी। काम पैक्स के जरिए होगा। रेट तय करने पर काम जारी है। मैजेस्टिक कंपनी बासमती चावल की प्रोसेसिंग करेगी। समितियों से कॉन्ट्रेक्ट किए जाएंगे। किसानों को अच्छी गुणवत्ता का राइस उगाने प्रेरित करेगी। खरीदी गारंटी देगी।

प्रस्ताव उतारने बनाया सीपीपीपी विंग

विभाग ने विंध्याचल भवन स्थित सहकारिता आयुक्त कार्यालय में ‘सीपीपीपी निवेश प्रोत्साहन विंग’ का शुभारंभ किया था। इसमें निवेशकों के लिए संपर्क, स्वागत कक्ष सहित संवाद एवं विमर्श का स्थान भी बनाया गया है। निवेशक सिंगल विंडो से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह विंग सहकारी समितियों, किसानों और निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी बना रहा है। अनुमतियों, प्रक्रियाओं के लिए एकीकृत मंच बना है।

मध्यप्रदेश के सीपीपीपी मॉडल को पूरे देश में सराहना मिली है। इस मॉडल से पूरे सहकारिता जगत में नई क्रांति आएगी। इससे सहकारी संस्थाओं की आय में वृद्धि होगी और रोजगार भी बढ़ेगा। जीआइएस के एमओयू पर अमल शुरू हो गया है। इसका लाभ जल्द किसानों को मिलने लगेगा। - विश्वास सारंग,सहकारिता मंत्री